हाँ मैं हूँ राम
Wednesday, October 7, 2020
एक शेर था मेरे धरती माँ का: एक शेर था मेरे धरती माँ का
एक शेर था मेरे धरती माँ का: एक शेर था मेरे धरती माँ का: एक शेर था मेरे धरती माँ का कहते थे सरदार जिसको जिसने माँ के अंग बचाएं होने ना दिया तितर-बितर इसको इसने अपनी जो कमर थी कसल...
Sunday, November 24, 2019
काला मन और रस्ता सुनसान, उसमें छिपा है एक शैतान।
काला मन और रस्ता सुनसान,
उसमें छिपा है एक शैतान,
अपनी बहन का चीर उतारे,
समझे महिला वस्तु के समान,
करता दुष्कर्म भय न लगता,
लगता इंसान है बना हैवान,
बस हवस की आग में डूबा,
हरता गया स्त्री का मान।
काला मन और रस्ता सुनसान,
उसमें छिपा है एक शैतान,
जाना मैंने तो खून ये खोला,
सोचा ले लूं मैं सबकी जान,
सोचा खत्म हो जाए दुनिया,
अगर न खत्म कर पाऊं दुख इसमें विधमान,
मानव का फिर अर्थ ही क्या,
जब इसमें शामिल ना स्त्री का मान।
काला मन और रस्ता सुनसान,
उसमें छिपा है एक शैतान,
सोचा आरक्षी का द्वार पढ़ु में,
थोड़ा दोस उस पर भी मड़ु मैं,
कहुँ कि अपना फर्ज निभाये,
मेरी बेहना को न्याय दिलाएं,
शैतानों को पकड़ ले आए,
कल का सूरज न वह देख पाए।
काला मन और रस्ता सुनसान,
उसमें छिपा है एक शैतान,
पाया दोषी हम उम्र थे मेरे,
उनकी काठी भी छात्र समान,
खड़े माँ-बाप उनके पीछे भी,
उनके दुष्कर्म पर आंख मिचे से,
सोचा क्या शैतान मेरे भी अंदर,
अगर है तो इसी छन चले जाएं मेरे भी प्राण।
काला मन और रस्ता सुनसान,
उसमें छिपा है एक शैतान,
चलो हम एक ऐसी दुनिया बनाएं,
स्त्री के मान पर कोई आँच न आ पाए,
किसी बहन का लाज न लुटे,
ले ले हाथों में मर्यादा की कमान,
सब में शील का वृक्ष उगाएं,
व्यक्ति को बनाएं राम समान।
काला मन और रस्ता सुनसान,
उसमें छिपा है एक शैतान।
उसमें छिपा है एक शैतान,
अपनी बहन का चीर उतारे,
समझे महिला वस्तु के समान,
करता दुष्कर्म भय न लगता,
लगता इंसान है बना हैवान,
बस हवस की आग में डूबा,
हरता गया स्त्री का मान।
काला मन और रस्ता सुनसान,
उसमें छिपा है एक शैतान,
जाना मैंने तो खून ये खोला,
सोचा ले लूं मैं सबकी जान,
सोचा खत्म हो जाए दुनिया,
अगर न खत्म कर पाऊं दुख इसमें विधमान,
मानव का फिर अर्थ ही क्या,
जब इसमें शामिल ना स्त्री का मान।
काला मन और रस्ता सुनसान,
उसमें छिपा है एक शैतान,
सोचा आरक्षी का द्वार पढ़ु में,
थोड़ा दोस उस पर भी मड़ु मैं,
कहुँ कि अपना फर्ज निभाये,
मेरी बेहना को न्याय दिलाएं,
शैतानों को पकड़ ले आए,
कल का सूरज न वह देख पाए।
काला मन और रस्ता सुनसान,
उसमें छिपा है एक शैतान,
पाया दोषी हम उम्र थे मेरे,
उनकी काठी भी छात्र समान,
खड़े माँ-बाप उनके पीछे भी,
उनके दुष्कर्म पर आंख मिचे से,
सोचा क्या शैतान मेरे भी अंदर,
अगर है तो इसी छन चले जाएं मेरे भी प्राण।
काला मन और रस्ता सुनसान,
उसमें छिपा है एक शैतान,
चलो हम एक ऐसी दुनिया बनाएं,
स्त्री के मान पर कोई आँच न आ पाए,
किसी बहन का लाज न लुटे,
ले ले हाथों में मर्यादा की कमान,
सब में शील का वृक्ष उगाएं,
व्यक्ति को बनाएं राम समान।
काला मन और रस्ता सुनसान,
उसमें छिपा है एक शैतान।
Friday, October 25, 2019
हाँ मैं हूँ राम
हाँ मैं हूँ राम तूफानों में खड़ा
हाँ मैं हूँ राम निश्चय पर अड़ा
मर्यादा मेरी लहू में बहती
कर्तव्य निभाने रण में खड़ा
स्वास में तूफान है मेरे
आँखों में है अंगारे
अपने निश्चय बल के सहारे
अधर्म पर मैं वज्र सा पड़ा
मैं वहीं हूँ जिसने रावण को मारा
अधर्मीयों को एक-एक कर संहार
किया पावन इस धरती को
दिया आराम जल्दी मिट्टी को
मैंने अनेकों बार जन्म लिया है
हर बार अपना कर्म किया है
कभी सुभाष कभी वल्लव कभी भगत
तो कभी लाल का नाम धरा है
मैंने फिर नया रूप लिया है
देख जो तेरे आगे खड़ा है
पहचान मुझे मैं हूँ राम
जान मुझे मैं हूँ राम
हाँ मैं हूँ राम युद्ध में भी स्थिर
हाँ मैं हूँ राम विचलित नहीं धीर
आया हूँ मैं करने युद्ध
माँ धरती को फिर करने शुद्ध।
हाँ मैं हूँ राम निश्चय पर अड़ा
मर्यादा मेरी लहू में बहती
कर्तव्य निभाने रण में खड़ा
स्वास में तूफान है मेरे
आँखों में है अंगारे
अपने निश्चय बल के सहारे
अधर्म पर मैं वज्र सा पड़ा
मैं वहीं हूँ जिसने रावण को मारा
अधर्मीयों को एक-एक कर संहार
किया पावन इस धरती को
दिया आराम जल्दी मिट्टी को
मैंने अनेकों बार जन्म लिया है
हर बार अपना कर्म किया है
कभी सुभाष कभी वल्लव कभी भगत
तो कभी लाल का नाम धरा है
मैंने फिर नया रूप लिया है
देख जो तेरे आगे खड़ा है
पहचान मुझे मैं हूँ राम
जान मुझे मैं हूँ राम
हाँ मैं हूँ राम युद्ध में भी स्थिर
हाँ मैं हूँ राम विचलित नहीं धीर
आया हूँ मैं करने युद्ध
माँ धरती को फिर करने शुद्ध।
Subscribe to:
Posts (Atom)